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Hymn No. 1496 | Date: 04-Jan-2000
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कायल हूँ मैं तेरे प्यार का, घायल हुआ है जो दिल।
कायल हूँ मैं तेरे प्यार का, घायल हुआ है जो दिल।
बेसबरा हो रहा हूँ मैं इंतजार करते – करते तेरा।
खोजता है मन गाहे – बगाहे प्यार भरा साथ तेरा।
चलना चाहता हूँ अमर पथ पे, हाथों में हाथ लेके तेरा।
प्यार का तरन्नुम छाया रहे, मस्तियों का दौर ना हो खत्म।
कब छूटा तन-मन, लिया कब कौन सा जन्म सबमें, मगन रहूँ में तुझमें।
जगाना है सोये हुये को, जो डूबा है माया के ख्वाबों में।
हमारा मानना है यहीं अब तक, चलती नहीं तेरे आगे किसीकी।
दबी हुयी है आग सीने में, फूट पड़न दे प्यार बनके उसे।
सहन ना होता है कुछ मुझे, भाप बनके उड़ जाने दे प्यार में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह