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Hymn No. 1497 | Date: 05-Jan-2000
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सोचता हूँ कभी ऐसा क्या करूँ, बस जाये तू मेरे दिल में।
सोचता हूँ कभी ऐसा क्या करूँ, बस जाये तू मेरे दिल में।
मिट जाये मेरी छाप मुझपे से, कैसे भी करके पड़ जाये तेरी छाप।
तेरी चाहत मिटाये ना मिटे कभी भी, चाहत बन जाऊँ मैं तेरी।
अभागे का भाग्य बदल जायेगा, जो हो जायेगा तू मेरा।
दिल ना रहेगा बेकरार जो तू कर लेगा मेरे प्यार का इकरार।
इस नकारे का जहाँ बदल जायेगा, जो मिल जायेगा पनाह दर पे तेरे।
खत्म हो जायेगी ख्वाबों का सिलसिला, जो हो गया मिलन।
बेताब मन हो जायेगा शांत, जो मिलेगा शरण चरणों में तेरे।
जीवन तो अब भी जी रहे है, तेरे मिलने से जीवन का कुछ और मजा होगा।
आलम छाया रहेगा दिल पे प्यार का, बन जायेगा जो तू मेरा बालम।


- डॉ.संतोष सिंह