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Hymn No. 147 | Date: 06-Apr-1998
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अरे मत पूछों हमपे क्या गुजरती है कभी – कभी जब याद आती है तेरी,
अरे मत पूछों हमपे क्या गुजरती है कभी – कभी जब याद आती है तेरी,
खो जाने को जी करता है तुझमें तेरी गलियाँ ढूंढ़ते – ढूंढ़ते ।
बस जाने को जी करता है तेरे दर पे, बन के चौखट, आते जाते तेरे कदमों को चूमूँ,
यूँ ही तेरी मस्ती में खोया रहना चाहता हूँ, करने और न करने से परे ।
तुझे बेपनाह प्यार करना चाहता हूँ, बेपरवाह हो के हर रिश्ते – नातों से ;
सौंप के तुझे अपने आप को, खो जाना चाहता हूँ तुझमें ।
नागवार लगता है मुझको तुझे से दूर होना ; या फिर तुझसे मिलके बिछुडना;
साथ चाहता हूँ मैं तेरा हर पल, तन मै रहे या मन में
दिल की हर धडकन के संग तेरा नाम गुनगुनाना चाहता हूँ,
कुछ भी तू कर पर मुझे अपना ले, कुछ नहीं तो तेरा गुलाम बना ले ।


- डॉ.संतोष सिंह