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Hymn No. 1511 | Date: 11-Jan-2000
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अच्छा तो ऐसी बात थी, प्रभु तुम पास होके भी दूर हो।
अच्छा तो ऐसी बात थी, प्रभु तुम पास होके भी दूर हो।
हमे ना था इतना अंदेशा चुकानी पड़ती है तेरे प्यार की कीमत।
अनमोल का मोल मत लगा खरीददार है एक से एक यहाँ पे।
मर जायेगे हम जैसे हाथ मलते –मलते, जिनके पास ना है फूटी कौड़ी।
तकदीर – तबदीर दोनों के मारे, हमको ना है तेरे सिवाय कोई और सहारा।
ले देके व्यवहार की दुनिया में अर्थहीन भावों का सैलाब है पास हमारे।
परे है व्यवहारिकता से, अपने ख्याली ख्वाबों की खिचड़ी पकाते हुये।
सबलवानों के बीच प्रभु कहाँ से पनप गये, हम जैसे दुर्बल कामनाओं वाले।
सँवारना है तुझे – तेरी दुनिया को हम जैसें से मुक्त कराके।
निर्मल – निर्दोष से निखरेगी घरा अंत हो जायेगा जो दोषों का।


- डॉ.संतोष सिंह