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Hymn No. 1512 | Date: 12-Jan-2000
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यार मेरे आया है अनाड़ी प्यार लेके पास तेरे।
यार मेरे आया है अनाड़ी प्यार लेके पास तेरे।
अकल का मारा बात बनाता, कई तरह – तरह की तुझे पाने के लिये।
समझाया तुझे बहुत करने के समय जाता है चूक।
ऐक नहीं पाया अपनीं कमियों को, दर्शाता दीवाना होने का।
कर ना चाहे बहुत कुछ, कर न पाये कुछ भी ढंग का।
करता चारों ओर शोर तेरे प्यार के रंग में रंग जाने का।
खुद को खुद की समझ नहीं खुदा तुझे पाने चला चौथा प्यार लेके।
हटाता नहीं तय का परदा, ख्वाब देखे तेरा प्यार पाने का।
गमों की ना है परवाह, भर रखा है मूर्खताओं को जो मन से।
बदलने को चाहे बदल नहीं पाता, बदल दे तेरी कृपा करके।


- डॉ.संतोष सिंह