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Hymn No. 1513 | Date: 12-Jan-2000
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ऐ परम पिता तेरे वश में क्या नहीं जहाँ में।
ऐ परम पिता तेरे वश में क्या नहीं जहाँ में।
पत्थर पे डूब जमाने वाले, निरंकुश दिलों से उपजाता प्रेम गीत तू।
सहज है तेरे वास्ते पलक झपकते असहज कार्यों को करना।
मिशाल एक नहीं कई - कई है विशालता तेरे दिल की।
फरियाद ना हूँ करता, ना ही रोना – रोने आया हूँ जीवन का।
प्रेम से भरना चाहता हूँ दिल को, प्रेम भरे गीत गा गाके।
रीझाना चाहता हूँ तुझको, अपने असीम प्यार में आबध्द करके।
सरकार है तू दिल का मेरे तेरी मर्जी में है मर्जी मेरी।
दुखों से ना डरता हूँ मैं, हाँ तड़प है तेरे पास रहने की।
ऐ सब कुछ करने वाले, नैय्या जीवन की तू ना खिवैया डूबो दे प्यार में।


- डॉ.संतोष सिंह