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My Divine Blessing
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Hymn No. 1514 | Date: 13-Jan-2000
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कोई कार्य ना होता है जग में अकारण।
कोई कार्य ना होता है जग में अकारण।
हर कार्य के पीछे होता है कोई ना कोई कारण।
रहस्यों पे से परदा उठाने की बात ना करता हूँ ।
जो ज्ञात है, सबर्त उसको दिल में बिठाना चाहता हूँ।
राहत कैसे मिलेगी मन को जब तक मिल न पाऊँ।
उससे मिलने के वास्ते गुजरनां पड़ेगा हर दौर से।
अंतिम ठौर है जीवन का, बदले है बाकी ठिकाने।
मुकाम तो तय है, श्रध्दा की नींव डालना है दिल में।
होने की चिंता से परे, खो जाना है उसमें।
बिन् रुखसत हुये, रूख करना है उसके दिल में।
- डॉ.संतोष सिंह
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