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Hymn No. 1515 | Date: 13-Jan-2000
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नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार प्रभु चरणों में तेरे कोटि – कोटि मेरा नमस्कार।
नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार प्रभु चरणों में तेरे कोटि – कोटि मेरा नमस्कार।
देंख देखके तेरे करतब विधाता आश्चर्य से खुली की खुली रह जाती है आँखें मेरी।
समझ नहीं आता क्या कहूँ इसे, नजरों का धोखा या तेरी मायावी दुनिया का जोर।
देखा है तुझे कई - कई बार तेरे बनाये माटी के पुतलों में, फिर भी माँगू तेरे होने का सबूत।
लाख समझाया दिल ने मन ने मानके किया मनमानी, हाय कितना डूबा हूँ तम के अँधेरे में।
पाट न पाया ज्ञान – अज्ञान के बीच की स्वामी, साई अलापा प्रेम का राग बार-बार।
हाजिर हुआ हूँ तेरे दरबार में सजदा करने को, प्रीत देखके तेरी भूल जाता हूँ प्रार्थना अपनी।
सचमुच खुदा तेरी महफिल में आके ये जान, पूजा से ज्यादा प्यार का दामन है तूने थामा।
करता हूँ गुजारिश तुझसे कर दे फेर – फार मुझमें, तेरी नजरों की हर बात उतर जाये दिल में।
जोर ना चले तेरा जहाँ का मुझपे, चले तो तेरा, रह न जाये कहने – सुनने को तुझसे।
- डॉ.संतोष सिंह
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