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Hymn No. 1516 | Date: 14-Jan-2000
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कैसी – कैसी जीवन की रीत है, मन को माया से है प्रीत।
कैसी – कैसी जीवन की रीत है, मन को माया से है प्रीत।
गाता हूँ प्रभु प्यार का गीत, जीतने के वास्ते मन को अपने।
नींद में आते है ख्वाब तरह – तरह के, जान नहीं पाता क्यों सताते है मुझको।
देता हूँ आवाज तुझे कई - कई बार, नजरें बचाके क्यों रहता है पास मेरे।
ढूँढता है दिल साथ तेरा हर पल, फिर भी क्यों हूँ अनाथ मेरे नाथ।
बाते तो बहुत हूँ बनाता, दिल तुझको क्यों ना है अपना बना पाता।
जताना चाहता हूँ प्यार, प्यार कोई भी कीमत पे करना चाहता हाँ तुझे प्यार।
गलत – सही से ना है मतलब, तेरे सान्निध्य के वास्ते करने को तैयार हूँ सब कुछ।
रब करने को ना कहता हूँ चमत्कार तुझसे, आकार ले लें प्यार मेरा दिल में।
जी लेंगे जीवन इसी के सहारे, समेंट के मन को दिल के भीतर।


- डॉ.संतोष सिंह