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Hymn No. 1537 | Date: 27-Jan-2000
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प्रभु सच पूछों तो बहुत दिल मचलता है तुझे लेके।
प्रभु सच पूछों तो बहुत दिल मचलता है तुझे लेके।
कभी मन करता है चुपचाप तेरे संग आँगन में खेलने को।
नाचूँ बदहवास होके, ना मिट जाये मन से लोक लाज।
हो उठता हूँ व्यग्न, जब गूंजे दिल में नया गीत सुनाने को तुझे।
सोना चाहता हूं तेरी गोद में, जोर से भिचके तुझे।
रातों को अपनी मूरखता से भरी बात सुनानां चाहता हूँ।
कोई क्षण ना बीते ऐसा, जब मेरा दिल रीता हो तुझसे।
नाता हो ऐसा तुझे खिलाने से पहले खा – खाके – खिलाऊँ तुझे।
बिन् बातकें कहूँ तुझसे, मानना पड़े तूझको हमें।
मिटाके हर भेद – अभेद बन जाउँढ, प्यार में तेरे संग रहके।


- डॉ.संतोष सिंह