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Hymn No. 1538 | Date: 28-Jan-2000
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याद है तेरी दिल में हजारों बातों के लिये।
याद है तेरी दिल में हजारों बातों के लिये।
भुलाये ना भूलता हूँ, तेरे संग गुजारे गये हँसी के पल।
कदम ना टिकते है जमीं पे, जब मुलाकात होती है तुझसे।
विचरने लगता हूँ आसमाँ में, तेरे ख्यालों में खोते ही।
मिट गया मेरे भीतर से आश्चर्य, जो मुलाकात हुयी तुझसे।
साकार होने लगे ख्वाब जो लेके देखे थे तुझें।
सारी ताब जाती रही, ताब दिलाता है दिल को बस तू।
आजादी किसे कहते है, जान पास आके तेरे।
हमदम अब दम निकल जाये, चाहूँ छूटे ना साथ तेरा।
इस गरीब को ना चाहिये कुछ, सिवाय तेरे सामिप्य के।


- डॉ.संतोष सिंह