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Hymn No. 150 | Date: 22-Apr-1998
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सच – सच कहता हूँ यार, प्यार करना मैंने सीखा तुझसे ;
सच – सच कहता हूँ यार, प्यार करना मैंने सीखा तुझसे ;
तूझे देखते ही प्यार हो गया था मुझको ।
सुन रखी थी बहुत सी ऐसी – वैसी बातें ;
गुजर गये हम भी उन राहों से, पता भी ना चला ।
पहली मुलाकात में मिली ढेर सारी सौगात तुझसे ;
तेरे करीब आके जाना प्यार क्या होता है ।
दिल भरी धडकता है बस मुलाकात के लिये अपने प्यार से ;
अब जाना वो कौन है जो चुरा जाता है रातों की नींद मेरी ।
बेखबर जब था मैं उससे, तब भी प्यार करता था वो हमसे ;
हर पल दुलारा उसने हमको, सराहा और सहारा उसने दिया ।


- डॉ.संतोष सिंह