Hymn No. 1543 | Date: 31-Jan-2000
हो जाये जहाँ में कुछ भी मेरा, कोई मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं।
हो जाये जहाँ में कुछ भी मेरा, कोई मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं। संसार में क्षणिक सुख मिलेकि, ना मिले तो कोई मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं। खुशामदी किसीकी चाहके कितना भी करें तो कोई मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं। कूदता रहे हर पल, कितना भी कर ले तू अपना कोई मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं। मोह में बंधके रह ले तू कितना भी, तोड़के जाना है कभी भी, कोई मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं। माया से भरी दुनिया में, जुड़ी है हर चीज माया से, कोई मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं। जानने का कर लें तू कितना भी दावा, जब जानेगा तो कोई मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं। करतब कितना भी दिखा ले तू अंजाम एक ही है कोई, मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं। अंदाज जीनेका बदलके ना बदला रहके सद्गुरू की शरण में, कोई मतलब नहीं, कोई मतलब नहीं। आगे – पीछे विचारे, कथनी – करनी में झलके अंदाज उसका, तो ही है मतलब इस जीवन का।
- डॉ.संतोष सिंह
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