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Hymn No. 1546 | Date: 02-Feb-2000
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सौंपने आया हूँ दिल अपना चरणों में तेरे।
सौंपने आया हूँ दिल अपना चरणों में तेरे।
मन को नाथ देना चाहता हूँ तेरे अनंत मन को।
स्वतंत्रता भुलाके हो जान चाहता हूँ आधीन तेरे।
खुदी को भूलाके मिल जाना चाहता हूँ खुदा तुझमें।
अंत हो जाये तन का, जतन हो जायेगा मेरा तूझमें।
औकात मिट जाये मेरी, सौगात में दूंगा दिल तुझे।
पुरस्कार ना चाहिये मुझे कुछ, इस्कर क्या है तेरे वास्ते।
गुजरे को भुलाके आने वाले पलों को कर दूँ नाम तेरे।
अपना होना न होना है बाँध दूँ तेरे सेहरे पे।
पता लेके तेरा लापता हो जाना चाहता हूँ तुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह