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Hymn No. 1547 | Date: 03-Feb-2000
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प्रभु कुछ ऐसी बात निकले दिल से, जो छू जाये तेरे मन को।
प्रभु कुछ ऐसी बात निकले दिल से, जो छू जाये तेरे मन को।
भावों में डूबके गाना चाहूँ गीत, जो विभोर कर जाये तुझको।
हर हाल में खुश रहके राग छेडूँ, प्रभु प्रेम का तुझको डूबाने के वास्ते।
जिस राह पे चल पडूँ, वो राह ले जाये प्रभु तेरे दर की और।
सताये विरह तेरी, दिल तड़प के मचले तेरा प्यार पाने के वास्ते।
अवरूध्द हो जाये कंठ इतना, आकंठ तक डूब जाऊँ तेरे प्रेम में।
नम आँखे बंद – बंद हो जाये आसुओं से, फिर भी झलके प्रभु तसवीर तेरी।
सजा जो चाहे तू दे लेना, वंचित ना करना प्रभु तू प्यार करने से।
यार तू डराया कर बहुत जोर से, डरके लिपट जाऊँगा तेरे कदमों सें।
जो भी बनानी है गत बना दे प्यार में, मजा आयेगा हमको भी बहुत।


- डॉ.संतोष सिंह