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Hymn No. 1555 | Date: 06-Feb-2000
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दे दे तू मेरे सारे सवालों का जवाब, जो लेके तुझे है मेरे में।
दे दे तू मेरे सारे सवालों का जवाब, जो लेके तुझे है मेरे में।
कतराता व्यक्त करने से उसे, चाहते हुये शब्द दे नहीं पाता हूँ।
जाने – अनजाने उठते रहते है मन में, क्षत कर जाते है दिल को।
दबाता हूँ बहुत मगर, पढ़े जा सकते है चेहरे के भावों पर से।
समझाया दिल को बहुत, चाहके भी कोई कुछ कर ना सकता है तेरा।
हर भाव से परे है तू, तेरे वास्ते ना है कोई अभाव।
प्रभाव ढाल नहीं सकता कोई तुझे, तू खुद को करता है विभोर।
मन तो वश में है तेरे, मन के सम्भाले सम्भल नहीं सकता तू।
इक् बार को होना है परे, फिर साथ रहके रहेगा तू इन सबसे अलग।
जानके जानता हूँ हाथों में होके कुछना है हाथों में मेरे, ऐ। खूदा।


- डॉ.संतोष सिंह