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Hymn No. 1562 | Date: 09-Feb-2000
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बहुत देखे होंगे प्रभु तूने, ऐसा नमूना ना देखा होगा कभी।
बहुत देखे होंगे प्रभु तूने, ऐसा नमूना ना देखा होगा कभी।
जो रात – दिन रहता है इस फिराक में कैसे कितना ढग लूँ तुझे।
खुश हुआ होगा अब तक अपनाके लाखों – करोड़ो दीवानों को।
कैसे गले में पड़ गया मतलबी, जो अंधा है स्वार्थ में अपने।
जपता है दिन – रात तेरा नाम, होके स्वार्थ में अंधा बगुले के समान।
नजरों में भक्ति का भाव लियें, मन में काम काम का ख्वाब सजोंये।
रहता है हर पल इतराता – डूबता अपनी अधूरी इच्छाओं के संग।
तूने भी बहुत चाहा सुधारना, न सुधरनें के लिये बहाना बनाया अनेक।
प्रभु गुजारिश है इस नीच की तुझसे, नाम ना कर सका तो बदनाम ना करूँ।
पिलाया है तूने प्यार का जाम, दाम नहीं तो तेरे कुछ काम आ जाऊँ।


- डॉ.संतोष सिंह