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Hymn No. 1563 | Date: 09-Feb-2000
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मुझे मालूम है, मुझे कुछ मालूम नहीं, प्रभु यही तो तेरा खेल है।
मुझे मालूम है, मुझे कुछ मालूम नहीं, प्रभु यही तो तेरा खेल है।
सब्र जानके कहता, मैं कुछ जानता नहीं, हमारी हर बात मानता नहीं।
उलझाये रखा है, दुनिया वालों को दुनियावी माया में, तोड़ना सबके वश की बात नहीं।
तेरी और बढने वालों को ललचाता है तू, सतरंगे सपने दिखा – दिखाके।
जो इक बार को उलझा, उसे तू सौंप देता है, खुद चुपके से निकलता है।
तेरी चाल अब ना चलेगी, निष्फल करेंगे हम अपने निर्मल प्रेम से।
देना है तो कई सौगता देना तेरी मर्जी से, तुझसे कम में हम मानेगे नहीं।
निकलती है जान तो निकल जाने दे, तेरे पास पहुँचे बिना रूकने वाला नहीं।
नश्वर संसार में पाके कितना पाऊँगा, इक् दिन बिछुड़ जाऊँगा सबसे।
तू इक् बार को जो मिल गया तो अमिट प्यार बनके रह जाऊँगा पास तेरे।
- डॉ.संतोष सिंह
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