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Hymn No. 1565 | Date: 10-Feb-2000
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महफिल में बैठा यारो का यार दिलदारों के साथ करते हुये प्यार की बरसात।
महफिल में बैठा यारो का यार दिलदारों के साथ करते हुये प्यार की बरसात।
इश्क हो रहा है हमको अपनी किस्मत पे, अश्कों की झड़ी लगी हें बेमौसम में।
क्यों किया कुछ ऐसा जो महफूज होना पड़ा यार के अनुपम प्यार के वास्ते।
अभी भी कुछ क्यों नहीं करता हूँ कुछ ऐसा, जो गलबहियाँ डालनें के वास्ते मजबूर कर देते है।
तू ही बता चैंन कैसे आयेगा हमको, जब तक प्यार ना पाऊँगा दिलबर का।
मन बना चूका हें दिल होनां होगां जो, वो देखा जायेगा आँख लड़ाने से बाज न आऊँगा।
किसी गैरं से ना हें मेरी जंग मैं तो खुद – खुद से लड़ रहा हूँ यार का प्यार पाने वास्ते।
गूवां ना होनां बीती बातों में गूजार दूँगा जिंदगी यार की यादों में।
फरियाद ना करुँगा यार का प्यार पाने वास्ते, हर मूलाकातें याद करुँगा।


- डॉ.संतोष सिंह