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Hymn No. 1570 | Date: 16-Feb-2000
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ऐ। यार कर मुझसे प्यार भरी बातें, अनदेखा करके कर्मों को।
ऐ। यार कर मुझसे प्यार भरी बातें, अनदेखा करके कर्मों को।
भ्रम में ना हूँ मैं, मुझे पता है तू मिला है प्रभु कृपा से।
तेरी मोल मैं क्या लगाऊगा, सारी अकूत संपदा झूठी है सामने तेरे।
मेरे वश में न था पकड़ना दामन तेरा, पकड़ा हूँ तो तेरी दया से।
जन्मों जन्म का मार खाया हुआँ, ना ही है कोई मेरी औकात।
कमजोर है मन मेरा, दृड़ता नहीं आयी है दिल में अभी।
लिपटा हुआँ हूँ क्षुद्रता से, ताकत नहीं कुछ कर दिखाने की।
गुजारिश है तुझसे, मन में तेरे जो आये, वो कर तू मेरे संग।
तौबा कर ले हाल देखके जहाँ मेरा, फिर न पैदा हो कोई सिरफिरा।
प्यास लगे तो देना तू सखी रेत, जिंदा लाश बनाकें छोड़ देना मुझे।
गिड़गिढ़ा के माँगू मौत, फिर भी तू मुस्कुराते हुये करना दुखों की चोट।
बरसाना स्नेह संसार के सभी प्राणियों पे, लाद देना हर इक् के कर्म को मुझपे।
फिर कोई ना देगा धोखा गुरू को अपने बन जाऊँ पर्याय मैं धोखे का।


- डॉ.संतोष सिंह