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Hymn No. 1571 | Date: 17-Feb-2000
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बैठे – बैठे मजा ले रहा है, हमको हमारे कर्मों की सजा भूगतता देखके।
बैठे – बैठे मजा ले रहा है, हमको हमारे कर्मों की सजा भूगतता देखके।
तुझको मजा आ रहा है, समझ ले हमको भी आ रहा है मजा।
तूने लाखों बार समझाया था, बिन समझे कर्मों में डूबक लगाया बार-बार।
कहाँ से कब जन्म जाती है इच्छायें, तेरे साथ रहते ले जात है दूर हमको।
जब आता है ख्याल, कर जाती है घायल तेरे – मेरे दिल को।
लाख सम्भलकें रखता हूँ कदम, कर जाता हूँ चूक न जाने कब।
पूर्व के संस्कार छुड़ाये ना छोड़ते है पीछा, न जाने कब तक पाऊँगा शिक्षा।
मंजूर है हमको तेरे द्वारा प्राप्त सजा, रजा इतनी सी हो, लेता रहूँ नाम तेरा।
करना चाहता हूँ तेरा बताया कार्य, होता रहे चाहे कुछ भी प्रभु हमारे साथ।
हारें कई बार है तो क्या से, जीतनें से परे बनके दिखाऊँगा तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह