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Hymn No. 1572 | Date: 17-Feb-2000
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माँ किसी ने ना दिया प्यार इतना ज्यादा, पग – पग पे हाथ पकड़के चलना सिखाया तूने।
माँ किसी ने ना दिया प्यार इतना ज्यादा, पग – पग पे हाथ पकड़के चलना सिखाया तूने।
जानके अनजाने बनकें दिया तूने प्यार, हमने भर दिया माँ कर्मों के काँटों से दामन तेरा।
एक ही पल में तेरे किये हुये पे फेरा पानी, इतनी भी ताकत ना रह गयी देखूँ और तेरी।
काम की आँधी बही, बह गया बिन सोचे समझे, दे दिया अपने कमियों को नाम प्रारब्ध का।
चला था जीतने की राह पे, अनजाने में तेरा कहा न मानके डूबा हार के गर्त में।
विश्वास श्रध्दा के हाथों से तिरना सिखाया था, छोड़के आसरा उनका सवार हुआ मन की मौजों पे।
बही झांझावत ऐसा सम्भल न पाया, हो गया तार-तार हर सिरा जीवन का।
माँ कमजोर था मैं तो तूने क्यों ना पकड़ा कसके हाथ मेरा, क्यों आ गयी नाबालिग के बातों में।
दोष कहीं से ना था तेरा, अज्ञान से भरे जोश में आके बह गया तिनके की तरह।
बहन – उबरने से अच्छा है तू इनमें रहके रमना सिखा दें तुझमें, ना पड़ें कोई और प्रभाव मुझपे।


- डॉ.संतोष सिंह