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Hymn No. 1574 | Date: 18-Feb-2000
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रो लेने दे, हँस लेने दे, तेरे आंगन में रच लेने दे स्वांग तरह-तरह के।
रो लेने दे, हँस लेने दे, तेरे आंगन में रच लेने दे स्वांग तरह-तरह के।
सब कुछ करने का एक ही अर्थ है, कैसे भी करके रीझा लूँ तुझे।
कृपा की तू करता रहना सदा बरसात, विकारों की आग हो जायेगी शांत।
जब तक ना मचलेगा दिल, तो कैसे मस्ती भरे गीत तुझे सुनाऊँगा।
तन का होने देना जो भी हाल, मन को ना उतरने देना तेरे रथ पे से।
गुत्थम – गुत्था हो जाऊँ इंतना, जीवन की कोई कड़ी सुलझ न पाये।
बन जाने दे मुझको तेरा साया, छू न पाये संसार की अद्भुत माया।
काया का साथ छूटता है, तो परवाह नहीं, परवाह है प्रभु तेरा प्यार पाने की।
जानेमन हो जाये मौत मेरी तिल – तिलके तब भी, आह के बदले निकले प्यार का गीत।
बना दे भीतर से मजबूत इतना, दुनिया की कोई बात करन पाये चोट।
ओट लेना नहीं चाहता फरियाद की, पर यादों में तिरना चाहता हूँ तेरे।
बाह्य में करूँ कोई भी हरकत उससे परे मैं रमता रहूँ हर पल संग तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह