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Hymn No. 1575 | Date: 18-Feb-2000
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मेरा मन ठोले बार – बार, संसार में माया को देखके।
मेरा मन ठोले बार – बार, संसार में माया को देखके।
कहता हूँ तुझे बार – बार याद करके, मर्जी में जो आये वो तू कर।
प्यार न पाऊँगा उफनती हुयी वैतरणी से हाथ लगाये बिन् तेरे।
साथ निभाना सीखूँगा, तेरे अमृतमय प्रेम रस में भीगके।
जीया तो कई बार जीया हूँ जी लेने दे इस बार जीया में बसाके तुझे।
कामुक मन का हर ले पाप तू मेरे, अनंत प्रताप से तेरे।
काँप उठे माया देखके तेरी त्योरी, हो जाऊँ स्वतंत्र तेरे अनंत में।
मन्नत माँगता हूँ हजार कुछ भी करके जीत लूँ तेरे दिल को।
चंचल मन भटकता है कई बार, पर दिल याद करे तेरे प्यार को हर बार।
बन जाने दे तेरे दरबार का अविचलित अंग तुझे निहारने के वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह