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Hymn No. 1577 | Date: 21-Feb-2000
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हमने ना दिया कभी दोष तुझे कुछ के वास्ते।
हमने ना दिया कभी दोष तुझे कुछ के वास्ते।
सिखा दे तू रहना खुश, आये जीवन में कितना भी परिवर्तन।
ये सब तो है हमारे प्रारब्ध का, लेनां – देना इनसे ना है कोई तेरा।
पर अब मन चाहता है रंगना तेरे प्यार के अनोखे रंग में।
विपरीत हूँ दुनिया से, कौन सा कर्म ना किया होगा मैंने।
उबर जाना चाहता हूँ इन सबसे, तेरा नाम लेने के वास्ते।
आज तक बैठें डाले फिरा करता था अपनी अबूझ इच्छाओं में।
रूख मोड़ दे तू उसका, गाने लग जाये अनुपम गीत तेरा।
इरादा न था अब तक कोई हमारा, जीये जा रहे थें जिंदगी ऐसे।
देखा तुझे कुछ तो भा गया मेरे दिल को, अब हर हाल कबूल है तेरे वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह