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Hymn No. 1578 | Date: 22-Feb-2000
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गाना चाहता हूँ कोई गीत नया, तेरे दिल को रिझाने वास्ते।
गाना चाहता हूँ कोई गीत नया, तेरे दिल को रिझाने वास्ते।
जीतना चाहता हूँ तेरे प्यार को, तुझे दिल में बसाने वास्ते।
याद करना चाहता हूँ हर पल, तेरी यादों में गुम हो जाने वास्ते।
हर भेद को मिटा देना चाहता हूँ, तेरा बन जाने के वास्ते।
गम हो या खुशी रहना चाहूँ आनंद में, तेरा नामरस पीते हुये।
ललक मिटाना चाहता हूँ मिलने की, तुझसे मिलने के वास्ते।
हर पल बढना चाहता हूँ, रास्ते में मिले चाहे ठोकर कितनी भी।
कृपा तू बस इतनी करना, आहत होता रहे कितना भी तन मन।
दिल डूबा रहे तेरे प्रेम में, चल न पाये इसपे किसीका जोर।
प्यार की डोर मैं बांधुँ कसके, हो जाऊँ प्रभु तेरे वश में।


- डॉ.संतोष सिंह