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Hymn No. 154 | Date: 28-Apr-1998
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ऐ मेरे खुदा तेरा प्यार पाके मैं तो निहाल हो गया ;
ऐ मेरे खुदा तेरा प्यार पाके मैं तो निहाल हो गया ;
काका तेरे चरणों में आके जीवन मेरा खुशहाल बन गया ।
पास क्या था मेरे, हर एक के प्रति आक्रोश ही था;
बाती तो सिर्फ साँझ ढले जले, हम तो दिन – रात जलते थे ।
किसी को अपना बनाना तो खाक, अपनों को गैर समझते थे ;
मन में तूफान लिये जग में तूफान मचाया करते थे ।
जो एक बार पास आ गये तेरे, पीछे छूट गया सब कुछ मेरा।
बदलना जारी रहा दिन हो या रात, मुझको कूछ ना समझ आया ।
मदहोश था मैं इतना तुझमें, श्वास का बंधन टूटा, ध्यान ना आया ।
हर रोज न जाने कितनी बार खुदको रगड़ते - चलते पाया ।


- डॉ.संतोष सिंह