VIEW HYMN

Hymn No. 1580 | Date: 22-Feb-2000
Text Size
निकल जाना है, निकल जाना है दुनिया में रहके दुनिया से दूर।
निकल जाना है, निकल जाना है दुनिया में रहके दुनिया से दूर।
फिर कर ना सके दुनिया की कोई मजबूरी, बनें दिल की मजबूरी।
कुछ ना रह जायेगा जीवन में जरूरी, जो किया तुझसे प्यार पूरी।
मिट जायेगी जनमों – जनमकी दूरी, बदल जायेगा हर लम्हा आनंद में।
सच पूछों तो सब कुछ रहेगा वैसे का वैसा, पर दिल डूबा रहेगा प्यार में तेरे।
औकात ना थी कभी भी हमारी, कहाँ से लाके दूँगा तुझको सौगात।
फितरत ना है फरियादों का रोना रोने की, रोके तुझे खोना नहीं चाहता।
बेबसी होगी चाहे हजार, डर बेबसेपन पे भारी है प्रभु तेरा प्यार।
जीवन में लग जाये अंगार, कम ना होने दूँगा प्यार को अपने।
सपनों में आज विचरता हूँ तो क्या, बदल दूँगा प्यार के जोर से साक्षात् मैं।


- डॉ.संतोष सिंह