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Hymn No. 1582 | Date: 23-Feb-2000
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प्रभु तेरी व्यवस्था है निराली, काला तो है दिल हमारा।
प्रभु तेरी व्यवस्था है निराली, काला तो है दिल हमारा।
फिर भी तू पीलाता है प्यार का जाम चाहे सुबह हो या शाम।
अवगुणों की खान है हम फिर भी लेने देता हैं नाम तेरा।
क्या ना है कमी हममें, फिर भी हरनें देता है साथ अपने।
दगा दिया कई बार तुझे, फिर भी तूने किया सदा कृपा हमपे।
मौंसम की तरह बदला रंग, फिर भी दिया तूने छूने चरणों को अपने।
आदतों से अपने बाज न आया, फिर भी तूने रखा विश्वास हमपे।
क्या न किया तेरे साथ हमने, फिर भी ऊफ् ना किया नजरों ने तेरी।
संकुचित दिलों – दिमाग वाला मैं, तेरा हृदय है प्रभु कितना विशाल।
शक होता है अपने आप पे, इंसा के वेष में कहाँ से आया अजीब प्राणी।


- डॉ.संतोष सिंह