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Hymn No. 1583 | Date: 24-Feb-2000
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खलबली मची है दिल में लेके प्यार को तेरे।
खलबली मची है दिल में लेके प्यार को तेरे।
दिलबर हूँ या दिलजला समझ न पाऊँ अपने हाल को।
जितना ही वार किया तुझपे, उतना बुरा हाल हुआ मेरा।
बेअसर क्यों होता है प्यार मेरा, समझ न पाऊँ सारे।
खार खाके किया ना कभी कुछ, बहा हूँ अपने मनोभावों में।
प्यार पाने निकला था तेरे, कैसे पड़ गया माया के फेरे में।
खदबदा रहा है मेरे भीतर कुछ बहने के वास्ते।
राहे प्यार पे खड़ा हूँ न जाने कब से इंतजार में तेरे।
लगे होंगे दाग कई, पर लगाया ना कभी तुझपे।
मेरी औकात् से बाहर का है तू, पर इनायत भी चीज है कोई।


- डॉ.संतोष सिंह