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Hymn No. 1584 | Date: 24-Feb-2000
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सुनना पड़ेगा सब कुछ तुझे, सुनके ना कर सकता है अनसुना।
सुनना पड़ेगा सब कुछ तुझे, सुनके ना कर सकता है अनसुना।
फरियाद ना है मेरी, है यें आवाज दिल की।
थरथराते ओठों से लेता हूँ नाम, इंतजार में तेरे निगाहें गयी सूख।
रसूख ना है मेरा इतना जो कह सकूँ तुझसे कुछ करने को।
पर पहुँच है जीतनी मेरी, उससे ज्यादा करता हूँ कोशिश प्यार करने की।
यार, देखा है हमने जनमजात गुणवान संस्कार मिलते हुये लोगों को।
कर्मों के प्रारब्ध से लेके पैंदा हुआ हूँ दुर्गुणों की खान मैं।
मेरी ना है कोई बिसात तेरे चहेते प्रियतम के सामने।
इस दोजख से आये हुये पे पड़ी जो निगाह तेरी, वही है बहुत वास्ते मेरे।
बेभानी में हुआ हूँगा अहंकार का शिकार, माफ कर देना मेरे प्यार।
जाने – अंजाने में दुर्गत बहुत सही है, कर देता है कोई आव भगत बहुत डरता हूँ।
हक् ना है मेरा किसीपे ना ही तुझपे, पर दे दे प्यार तेरा कृपा करके।


- डॉ.संतोष सिंह