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Hymn No. 1586 | Date: 25-Feb-2000
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अपनी कामनाओं को दे देते है तेरे इम्तिहान का नाम।
अपनी कामनाओं को दे देते है तेरे इम्तिहान का नाम।
मन की दुष्प्रवृत्तियों को न भुलाके डूबते है तेरे भक्ति में।
कहाँ से पायेगा शक्ति जब दिल युक्त ना हो पाये तुझसे।
अपने स्वार्थों को पोषित करने के जुगल में रहते है हर क्षण।
दावा बहुत करते है पर अपना किया वादा ना निभाते है तुझसे।
खुद माया के जाल से लिपटे है बचाने को कहते है तुझसे।
परत दर परत बहुत गहरा भरा है गलत, ढुंढ़ते है संसार में गलतियाँ।
संयोगों को न मानके वियोग का रोना रोते है जोहते हूये बाट तेरी।
इन सबसे अलग में रहके तू कहता हें, हो जा अलग ना है तेरी तरह हम।
बिन तेरे हाथ लगाये सँवर न पायेंगे, संसार तो भरा है भँवरों से।


- डॉ.संतोष सिंह