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Hymn No. 1588 | Date: 26-Feb-2000
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भीड़ में शामिल होके, भीड़ से अलग रहूँ।
भीड़ में शामिल होके, भीड़ से अलग रहूँ।
करता रहूँ कुछ भी, करते हुये तुझमे रमूँ।
रमना ना है संसार में, पूरा करना है दायित्वों को।
प्रभु मेरा अस्तित्व ना है किसी के सहारे, है सिर्फ तेरे।
हारता रहा हूँ अब तक, पर मानी ना है हार अभी।
मेरे यत्नों पे बरसाते जान प्रभु कृपा तेरी।
करना तो है मुझे, करवाना तेरे हाथों में।
जो भी होगा मेरे साथ, बिन भाव के करेंगे कबूल।
मुक्कदर मेरा तू है, तू ही है सिकंदर।
अंदर-बाहर के हर अंतर को मिटाके रहे तू मेरे अंदर।


- डॉ.संतोष सिंह