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Hymn No. 1593 | Date: 03-Mar-2000
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आप और हम, हम और आप, है दोनों साथ – साथ।
आप और हम, हम और आप, है दोनों साथ – साथ।
हाथें में हाथ, मन में तेरे प्रेम के सिवाय ना है दूजी कोई बात।
धर्म का न है मुझे ज्ञान, खोया रहूँ तेरे प्यार में।
कर्मों को न मानके, कर्मों से परे मानूँ में तुझे।
होने को ना कुछ हो सकता है, संसार में तेरे बतायें हूयें दायीत्वों को निभाता हूँ।
करके सब कुछ ना पड़ना किसी फेरे में, डालना है डेरा दर पे तेरे।
देने को तू क्या न देता है तू मुझे, भर दे दिल को प्यार से तेरे।
घायल कितना भी हो तन, घायल ना होने देना दिल को मेरे।
शिकवा है तो बस प्यार का तेरे, जाना है काबिल न थे फिर भी पाया प्यार लेता।
खत्म ना हुयी है माँग जो अब तक है अधूरी, क्या करके मिटेगी तेरे मेरे बीच की दूरी।


- डॉ.संतोष सिंह