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Hymn No. 1595 | Date: 04-Mar-2000
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हें प्रभु तेरी लीला समझना मेरे वश की बात नहीं।
हें प्रभु तेरी लीला समझना मेरे वश की बात नहीं।
जो एक पग में लाँघे ब्रह्माण्ड सारा, माँगे दान भक्तो से।
मुश्किल है जानना तुझे, आसान है प्यार करना तुझसे।
झुठलाये अपने आपको, नये – नये संदर्भों के रूप में ढालके।
तेरी हर कथा – विधा भरी है अनहोनियों से, तू ना करे मजबूर मानने को।
सहता है, रमता है जग के कोने – कोने में, फिर भी ना करे कोई दावा।
जिसने जो अर्पित किया – किया बेहिचक कबूल तूने।
अच्छा हो या बुरा जो भी आया दर पे तेरे तूने ना लौटाया किसीको।
हँस – हँसके सहा हमारे कर्मों को तूने, झूठमूठ का रोना रोये हम।
गमो का विष पीके बरसाया प्यार का अमृत तूने सदा हमपे।


- डॉ.संतोष सिंह