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Hymn No. 1596 | Date: 04-Mar-2000
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मुझे जो चाहिये वो मिल गया, करना है अब जतन।
मुझे जो चाहिये वो मिल गया, करना है अब जतन।
सारे अपने भान को मिटाके, हो जाना है मगन उसमें।
मिट जाये जान जो उसके पीछे, बन जायेगे जान उसके।
राहत दे ना पाये अब तक दुनिया के सारे ऐशों – आराम।
सुकून आ जाता है दिलमें जो पड़ जाती है मिट्टी नजर उसकी।
मानेगा ना कोई उमड़ पड़ता है जो आनंद का ज्वार अंदर से।
हवा हो जाती है हम, जो फूट पड़ते है गीत दिल के भीतर से।
मचल के चला देते है हम भी तीर नजरों के, जो छू जाते है यार को।
बहुत सम्भालने का करता है प्रयत्न, पर कर बैठता है प्यार वो भी।
उसकी हर बात का है हमारे पास एक अमोध जवाब वो है प्यार।


- डॉ.संतोष सिंह