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Hymn No. 1600 | Date: 05-Mar-2000
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वादे तुझसे किये बहुत निभाना न आया एक भी।
वादे तुझसे किये बहुत निभाना न आया एक भी।
ऐसा कैसे हो जाता है, कहते समय करने की क्यों ना हूँ सोचता।
बातें ना बनाता हूँ, सीधी – सीधी दिल की बात करता हूँ।
ऐसा ना है कुछ जो छुपाऊँ तुझसें, बात आती है जो मन में कहना चाहूँ वो।
गलतियाँ की है कई बार, पर हमने करना न चाहा एक भी बार।
कब कैसे क्या कर बैठता हूँ, होश में रहते हुये भी ना रहता हूँ।
कब वो पल आयेंगा जब होंगे हम अचूक हर परिस्थितियों में।
होता रहे कुछ भी, हम तो मशगूल होंगे तेरा कहा करने में।
तंग आया नहीं, दंग होता हूँ, जानते हुये क्यों मौके का फायदा उठाया नहीं अब तक।


- डॉ.संतोष सिंह