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Hymn No. 1603 | Date: 09-Mar-2000
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दिल में हर पल तेरी बात हो, मन में ना हो कोई फरियाद।
दिल में हर पल तेरी बात हो, मन में ना हो कोई फरियाद।
जब भी बैठूँ सामने तेरे, शुरू हो जाये अंतहीन प्यार का सिलसिला।
नाम ना ले खत्म होने का, चाहे हो जाये खत्म जीवन।
कहने – सुनने का ना हो कोई मतलब, कहते रहे सब कुछ निगाहों को निगाहों से।
थिरकता रहूँ तेरे सामने नये – नये भाव – भंगिमाओं सें तुझे रिझाने के वास्ते।
ऐसा अब कुछ ना करना चाहूँ जिससे फर्क आ जाये मेरे प्यार में।
मेरे बगैर तेरी चल जायेगी, तेरे बगैर मेरी चल न पायेंगी एक भी पल।
पड़ा था दल – दल में न जाने कितने जन्मों से उबारा है तूने।
मेरे मन में पैदा होते रहते हें न जाने कितने तरह के भाव लेके तुझे।
तू जानते हुये अंजान बनता है शायद कहीं कोई कम है हममें।


- डॉ.संतोष सिंह