My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 1604 | Date: 11-Mar-2000
Text Size
मिटते हुये देखा संसार को पल – पल में।
मिटते हुये देखा संसार को पल – पल में।
जन्मते हुये को मरते देखा, रूकना न पाया कोई।
सब कुछ जानके, अंजान बना रहा इंसान।
कोई बात ना है ऐसी, जो कह सके कहानी उसकी।
जान – पहचान पैदा कर जाती है मन में हैरानी।
एक ही क्रम – क्रम को क्यों बार – बार हूँ दोहराता।
मोह अटका है चमड़े के थैले में जो छोड़े सदा साथ।
जो नजर न आये ओझल हुआ है कभी न कभी।
गत तो हर स्वरूप की है एक जैसी समझो प्यारे।
कह गये अलग – अलग शब्दों में, सब बात एक ही।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
दिल में हर पल तेरी बात हो, मन में ना हो कोई फरियाद।
Next
पुकार सुनके अनसुनी ना कर सकता है तू मेरी।
*
*