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Hymn No. 1605 | Date: 16-Mar-2000
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पुकार सुनके अनसुनी ना कर सकता है तू मेरी।
पुकार सुनके अनसुनी ना कर सकता है तू मेरी।
हँसना ना है, रोना ना है, मुझको तो है बनके तेरा जीना।
सुख आये चाहे दुःख, छू ना सके मेरे मन को मग्न रहूँ तुझमें।
क्या करना – क्या न करना, एक ही बात जाना जब तू चाहे करा ले मुझसे।
कहा रह गया कुछ मेरा, जो रंग गया मेरा दिल प्यार में तेरे।
सारे जन छूट जाये, टूट जाये सारे आसरे, हम तो है तेरे सहारे।
कहकहा लगाता हूँ अपनी बेबसी पे और तेरे सामर्थ्य पे, देर – सवेर होना है एक।
अहंकार ना है ना ही ज्ञान का दंभ, यें है तो है तेरे आनंद का ज्वार।
सच पूछो तो मिटते जा रहो है सारें सरोकार, मुझे ना करना किसी पे परोपकार।
आकार ले चुका प्यार तेरा दिल में मेरे, निराकार होके मिल जान है तुझमें।


- डॉ.संतोष सिंह