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Hymn No. 1608 | Date: 19-Mar-2000
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कुछ और कर दिखाना चाहता हूँ, तेरा प्यार पाने के वास्ते।
कुछ और कर दिखाना चाहता हूँ, तेरा प्यार पाने के वास्ते।
अंचभे में डाल देना चाहता हूँ, तुझको रिझाने के वास्ते।
नभ – पाताल का भेद मिटा देना चाहता हूँ, तेरे प्यार की मस्ती में।
कुछ भी करके करना चाहता हूँ सवारी, आनंद की मौजों पे।
इतराना चाहता हूँ, जब तू कर ले मेरे प्यार का इकरार।
मौज मनाते हुये फिरना चाहता हूँ, निराकार से साकार में बदलता देखके तुझे।
विरह की वेदना को भुला देना चाहता हूँ, जहाँ भी चाहूँ वहाँ पाऊँ तुझे।
मत पूँछ हैरान करना चाहता हूँ, तेरे दर्द को अपना बनाके।
कर ले सौंपने की तैय्यारी, तेरे आशीष से कर दिखाऊँगा चाहा हुआ तेरा।
कुछ भी उधार ना रखुँगा तेरी कृपा से पूरा का पूरा लौटाऊँगा।


- डॉ.संतोष सिंह