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Hymn No. 1611 | Date: 19-Mar-2000
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जीवन का हर पल जुड़ जाये तुझसे, रहते हुये ना रहे हम अपने आपके।
जीवन का हर पल जुड़ जाये तुझसे, रहते हुये ना रहे हम अपने आपके।
तंग हो या किसी और रंग में रंगे, पर मौज मनाते रहे तेरे संग।
जंग चलती रहे, अपने आप से या जग से, मैं रंगा रहूँ तेरे प्यार के रंग में।
ऐसा कुछ ना है अनोखा पास मेरे, कि रिझा सकूँ तेरे दिल को।
हूँ मैं लाखों – करोड़ो में से एक, जो मारे हुये है अपने वृत्तियों के।
नाथ ले इस अनाथ के मन को, तेरे अनंत मन में लुप्त हो जाऊँ उसमें।
बिन् कृपा तेरे अधूरा हूँ, मिल जाये जगत सारा फिर भी ना हो सकता है पूरा।
घूल में पड़ा हूँ प्रभु, बनना चाहता हूँ तेरे दिल का नूर।
सहना पड़ेगा जो कुछ भी, हँस – हँसके कहूँगा प्रभु तेरा आशीष पाके।
ठीक तरह से गाके कहना भी नहीं आता, घुरघुराता हूँ भद्दी आवाज से।


- डॉ.संतोष सिंह