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Hymn No. 1616 | Date: 22-Mar-2000
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मैं जानता हूँ वक्त अभी आया ना है मेरा।
मैं जानता हूँ वक्त अभी आया ना है मेरा।
मैं जानता हूँ अभी कहा हुआ तेरा किया ना हूँ।
झूठा हूँ मैं, झूठा है प्यार मेरा, इसलिये तू रहता है रूठा।
भर गया है दिल कुंठाओं से, देखके अपने भीतर के खोट को।
तूने लुटाया है प्यार सदा, हमने पहुँचायी चोट तेरे दिल को।
तेरा कहा हुआ न मानके, जीता रहा हूँ जिल्लत की जिंदगी।
छिन्न – भिन्न कर दे अस्तित्व को हरके हृदय प्राणों को मेरे।
सीख मिलेगी जग को, होता है हाल ये परम् प्रिय से दगाबाज़ी करने का।


- डॉ.संतोष सिंह