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Hymn No. 1617 | Date: 22-Mar-2000
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आज उठने का ना है दिल, पास से तेरे।
आज उठने का ना है दिल, पास से तेरे।
तेरा साथ छूटते ही, जग में जाके हो जाता हूँ जग का।
सुनाया है तूने अमृत से भरा राग प्यार का।
तसव्वूर ना मिलता है दिल को, तेरे सिवाय कहीं और।
जोर नहीं चलता अपने आप पे, तो कैसे चलाऊँ तुझपे।
भूल जाना चाहता हूँ इस हाड़ - मांस के अस्तित्व को प्यार में तेरे।
इतना भी ना हूँ गया गुजरा, जो ना बना सकूँ तुझे अपना।
कहीं तो कोई कमी है बाकी, जो पूरा करनी है तुझे।
प्यार ना दे सका तो दे दे तेरे दर्द को, समझूँगा प्यार तेरा।
कितना भी हूँ कमजोर, सामर्थ्य है तेरे आशीर्वाद का पास मेरे।


- डॉ.संतोष सिंह