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Hymn No. 1618 | Date: 22-Mar-2000
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लग गयी, लग गयी हाथो मेरे यार की प्यार भरी दास्ता।
लग गयी, लग गयी हाथो मेरे यार की प्यार भरी दास्ता।
हर्षित हो उठा मन मेरा, इक् इक् अक्षरों ने छुआ जो तेरे दिल को।
अलग – अलग अंदाज में करता है हर इक् से प्यार का इजहार वो।
हो जाता हूँ बेचैंन, जब गीत गूँज उठते है उसके दिल में।
सच पूछो तो मन रहता नहीं आपे में, कब खो जाऊँ उसमें।
कसमे तो खाता नहीं, पर उसके सिवाय रूचता नहीं दिल को कुछ।
मौत देना है तो दे दे, पर इतना भयानक दर्द भरा इम्तिहाँ ना ले।
सब कुछ सह सकता हूँ मैं, सह नहीं सकता जुदाई से भरा लम्हा।
हंसती है दुनिया तो कोई बात नहीं, तेरा हँसना कर देता है नग्न सरेआम मुझें।
बदला सब कुछ बदली ना मेरी फितरत, तुझे पानी के लिये करूँगा सारी कसरत।


- डॉ.संतोष सिंह