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Hymn No. 1619 | Date: 23-Mar-2000
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कैसे रहूँ जब दिल को रास न आये कुछ तेरे बिना।
कैसे रहूँ जब दिल को रास न आये कुछ तेरे बिना।
जहाँ भी जाऊँ सताये याद तेरी, दिल को समझाऊँ कैसे।
धधक रहीं है याद सीने में, बनके प्यार की लौ।
कर देना चाहता हूँ होम इसमें तन – मन को अपने।
मिट जाये मेरा सब कुछ, आड़े न आये तेरे – मेरे बीच कुछ।
सारे सवाल मिट जाये जो लेकर है तुझे दिल में।
खालीश प्यार हो और तू, झूमता रहूँ मस्ती में।
मिलन – बिछोह का भेद मिटाके हो जायें हम एक।
निस्तब्ध – शांत – समा में हो गूँज तेरे प्यार की।
मिटने – बनने से परे देखता रहूँ कारस्तानी माया की।


- डॉ.संतोष सिंह