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Hymn No. 1620 | Date: 24-Mar-2000
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खत्म होता रहे तन से श्वासों का सिलसिला, करुँगा ना कभी फरियाद।
खत्म होता रहे तन से श्वासों का सिलसिला, करुँगा ना कभी फरियाद।
पर होगा गर दिल से खत्म प्यार का सिलसिला, मचा दूँगा शोर सारे जग में।
एक ही बात है मन में मेरे, करना चाहता हूँ हर पल प्यार तुझे।
सच है या झूठ रूठ जाये चाहे कोई, रूठना ना कभी तू मुझसे।
जीते जी बदल जाऊँगा लाश में, जग के साथ रहके – रह न पाऊँगा जग में।
जो भी कहना है कह दे स्पष्टता से, मत देख हिकारत भरी नजरों से।
सहा तो बहुत कुछ है, सह नहीं सकता तेरी इक् तिरछी नजर।
बना के रख लें तेरे दर का कुत्ता, पर करना ना कभी दूर तू मुझको।
कहने पे तेरे कर लूँगा दुनिया की जी हजुरी, पर मंजूर ना है तेरे-मेरे बीच की दूरी।
सच मान कुछ ना रह गया जरूरी मेरे वास्ते, पर जरूरत है तेरी हर पल।


- डॉ.संतोष सिंह