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Hymn No. 1621 | Date: 24-Mar-2000
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इक् बात कहता हूँ कसम से प्यार है मुझको तुझसे।
इक् बात कहता हूँ कसम से प्यार है मुझको तुझसे।
करना पड़ेगा एतबार, रहता है दिल हर पल तेरे दरबार में।
चल गया मुझपे तेरा जादू, दिल धड़के पाके प्यार तुझसे।
खत्म हो जाये ये तन, खत्म होने ना देना सिलसिला प्यार का।
खिलखिला उठता हूँ, जब भी डूबाता है तू आनंद में।
ऐ सच्चिदानंद जी चाहता है करूँ प्यार जी भरके हर कण से।
धुन दे मेरे जीवन को तेरी किसी धुन में गूँज उठूँ चारों दिशाओं में।
तिरता फिरूं मनचली हवाओं पे, छूटें ना तेरा कोई भी कोना।
सोया था अब तक उठाया है तुने प्यार की लोरी सुनाके।
अब ना सोने देना, खो जाने देना तेरे अनंत आँचल में।


- डॉ.संतोष सिंह