VIEW HYMN

Hymn No. 1624 | Date: 25-Mar-2000
Text Size
कहीं ना कही है अटके, प्रभु राह से है भटके।
कहीं ना कही है अटके, प्रभु राह से है भटके।
तेरे बगैर बतायेगा कौन राह, सच्चा ज्ञान कौन समझायेगा।
सोये है माया की चद्दर तानके, भान में बेभान है हम।
मैं का जाम पीये हुये, आकंठ डूबे है इच्छाओं में।
लंबी - चौड़ी है बातें, भीतर छाया हुआ है धुप्प अँधेरा।
घूम रहे है निगाहो पे बाँधे वासनाओं की पट्टी।
तुझसे बड़ा ना है कोई फनकार, नाचते है इशारे पे तेरे हम।
तेरी मर्जी जो आये वो तू कर, सुन ले मेरी बात इक् बार को।
मुझे पीना है प्रेम का प्याला, लायक उसके बनाना तू मुझे।
जो भी करना – करवा ले मुझसे, आड़े ना आऊँगा तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह