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Hymn No. 1625 | Date: 25-Mar-2000
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इक् बार फिर से खो जाने दे प्रेम संसार में।
इक् बार फिर से खो जाने दे प्रेम संसार में।
दूर हुआ हूँ तुझसे, दूर हुआ है ना जो तू दिल से।
कुम्हला गया हूँ, बँधते माया के इंद्रजाल से।
खिलखिलाता था यूँ ही, हो गयी हँसी मेरी लूप्त।
पता नहीं ऐसी कौन सी सुप्त भावना थी, जो कर गयी दू।
खुशियों में रमां रहता था, दिन गुजरने का न था भान।
क्यों अटक गयी निगाह काम पे, जिसनें ढकेला संसार में।
बाँध सकता नहीं कोई, चखा है जाम मैंने तेरे प्यार का।
नाम से ना है लेना – देना, गुमनाम हो जाना है प्यार में।
सरजाम देंगे, आयेगा चाहे राहे प्यार में कुछ भी चूर करेंगे उसे।


- डॉ.संतोष सिंह